पाइलोरिक स्टेनोसिस Pyloric stenosis (इंफेंटाइल हाइपरट्रॉफिक पाइलोरिक स्टेनोसिस)

पाइलोरिक स्टेनोसिस क्या है?

पाइलोरिक स्टेनोसिस, जिसे इंफेंटाइल हाइपरट्रॉफिक पाइलोरिक स्टेनोसिस (IHPS) भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट के निचले हिस्से (आउटलेट) की मांसपेशी असामान्य रूप से मोटी हो जाती है। इस संकीर्णता के कारण दूध / भोजन आसानी से छोटी आंत में नहीं पहुंच पाता, जिससे शिशुओं में भोजन करने से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

लक्षण और संकेत

यह बच्चे जन्म के समय अक्सर स्वस्थ दिखते हैं, लेकिन कुछ सप्ताह बाद—आमतौर पर 2 से 8 सप्ताह की उम्र में—बहुत तेज और जोरदार उल्टी होने लगती है। उल्टी धीरे-धीरे प्रोजेक्टाइल (दूर तक फेंकने जैसी) हो जाती है और बच्चा केवल दूध उल्टी करता है, कभी पित्त नहीं। उल्टी के बावजूद बच्चे भूखे रहते हैं और बार-बार दूध मांगते हैं।

अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
  • कम गीले नैपी / डायपर (पेशाब कम होना)
  • पेट की बढ़ी हुई दिखाई देने वाली मांसपेशीय गतिविधि
जल्दी पहचान क्यों जरूरी है?

प्रोजेक्टाइल उल्टी के कारण तेजी से डिहाइड्रेशन और सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन हो सकता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो यह बच्चे की वृद्धि और समग्र स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

पाइलोरिक स्टेनोसिस का निदान कैसे किया जाता है?

इसका निदान एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड द्वारा किया जाता है, जिसमें पाइलोरिक मांसपेशी की मोटाई दिखाई देती है।

इसके अलावा, बच्चे का पूरा इतिहास और शारीरिक जांच इस स्थिति को पहचानने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

IHPS का उपचार

पहला कदम है बच्चे को स्थिर करना- नसों में ड्रिप की मदद से डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को ठीक करना।

इसके बाद पायलोरोमायोटॉमी नामक सर्जरी की जाती है, जो इसका निश्चित इलाज है। यह सर्जरी अनुभवी हाथों में सुरक्षित होती है और आमतौर पर छोटे चीरे से की जाती है।

रिकवरी और भविष्य

सर्जरी के कुछ घंटों बाद ही बच्चे को दूध देना शुरू किया जा सकता है और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाई जाती है।

सर्जरी के बाद कुछ हल्की उल्टी हो सकती है, जो सामान्यतः अस्थायी होती है।

लंबे समय में परिणाम बहुत अच्छे होते हैं और लगभग सभी बच्चे सामान्य रूप से बढ़ते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें

यदि बच्चे में:

  • बार-बार और जोरदार उल्टी
  • डिहाइड्रेशन के संकेत
  • वजन न बढ़ना
  • अत्यधिक सुस्ती दिखे, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

समय पर निदान और उपचार जटिलताओं से बचाव करता है और सामान्य विकास सुनिश्चित करता है।

डॉ. डी. भादू — विशेषज्ञ देखभाल

डॉ. डी. भादू, जयपुर के Kidsurg Clinic में शीर्ष बाल शल्य चिकित्सक हैं और AIIMS दिल्ली से प्रशिक्षित हैं। वे पाइलोरिक स्टेनोसिस (Pyloric stenosis) सहित बाल गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल सर्जरी में विशेषज्ञ हैं। सटीक तकनीक और दयालु, बच्चों पर केंद्रित देखभाल के लिए प्रसिद्ध, डॉ. भादू निदान से लेकर सर्जरी, रिकवरी और लम्बी अवधि की फॉलो-अप तक हर चरण की व्यक्तिगत रूप से देखभाल करते हैं, जिससे सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होते हैं।

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