क्या बच्चों में हर हर्निया का ऑपरेशन जरूरी होता है?
जब किसी बच्चे में हर्निया का पता चलता है, तो माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है—“क्या ऑपरेशन कराना जरूरी होगा?”
आइए इसे समझते हैं।
बच्चों में हर्निया क्या होता है?
हर्निया तब होता है जब शरीर का कोई अंदरूनी अंग या ऊतक मांसपेशियों की कमजोर जगह से बाहर की ओर उभर आता है।
बच्चों में यह आमतौर पर:
- जांघ/ग्रोइन (इंग्वाइनल हर्निया)
- या नाभि के आसपास (अम्बिलिकल हर्निया)
के रूप में दिखाई देता है।
क्या हर हर्निया में ऑपरेशन जरूरी है?
नहीं, हर हर्निया में तुरंत ऑपरेशन जरूरी नहीं होता।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि हर्निया का प्रकार क्या है, बच्चे की उम्र क्या है और लक्षण कैसे हैं।
किन हर्निया में ऑपरेशन जरूरी होता है?
इंग्वाइनल हर्निया (ग्रोइन में सूजन)
- हमेशा ऑपरेशन की जरूरत होती है
- यह अपने आप ठीक नहीं होता
- आपरेशन ही एकमात्र इलाज
- अगर इलाज न किया जाए तो जटिलताएँ हो सकती हैं
दर्द या समस्या पैदा करने वाले हर्निया
- सूजन का सख्त या दर्दनाक हो जाना
- हर्निया का अंदर न जाना (फंस जाना)
ऐसे मामलों में तुरंत इलाज जरूरी है
किन हर्निया में तुरंत ऑपरेशन जरूरी नहीं होता?
अम्बिलिकल हर्निया (नाभि के पास सूजन)
- यह शिशुओं में आम है
- अक्सर 4-6 साल की उम्र तक अपने आप ठीक हो जाता है
- ऑपरेशन तभी किया जाता है जब:
- यह 4 साल के बाद भी बना रहे
- या बड़ा/दर्दनाक हो जाए
कौन से लक्षण खतरनाक हो सकते हैं?
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:
- सूजन में अचानक दर्द होना
- लालिमा या रंग बदलना
- उल्टी या पेट दर्द
- सूजन का सख्त हो जाना या अंदर न जाना
क्या बच्चों में हर्निया का ऑपरेशन सुरक्षित है?
हाँ, बच्चों में हर्निया का ऑपरेशन:
- सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है
- कम जोखिम वाला होता है
- अक्सर एक दिन में ही (डे-केयर) पूरा हो जाता है
अगर हर्निया का इलाज न किया जाए तो क्या होगा?
खासतौर पर इंग्वाइनल हर्निया को नजरअंदाज करने से:
- हर्निया फंस सकता है (Incarceration)
- खून की सप्लाई रुक सकती है (Strangulation – इमरजेंसी)
इसलिए समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
तुरंत बाल शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ से सलाह लें अगर:
- बच्चे के पेट, नाभि या ग्रोइन में सूजन दिखे
- सूजन रोने या जोर लगाने पर बढ़ती हो
- ऊपर बताए गए खतरनाक लक्षण दिखें
निष्कर्ष
हर हर्निया में ऑपरेशन जरूरी नहीं होता—लेकिन कुछ मामलों में यह बेहद जरूरी होता है।
समय पर जांच और सही सलाह से बच्चे को जटिलताओं से बचाया जा सकता है और माता-पिता को भी मानसिक शांति मिलती है।
