फिमोसिस का इलाज कब करवाना चाहिए?
फिमोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिंग की त्वचा (फोरस्किन) को खींचकर ग्लान्स् के पीछे तक नहीं ले जाया जा सकता। यह छोटे बच्चों में आम होता है और अक्सर उम्र बढ़ने के साथ अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ स्थितियों में इलाज जरूरी हो जाता है।
बच्चों में हल्का फिमोसिस सामान्य होता है और आमतौर पर किसी इलाज की जरूरत नहीं होती। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, फोरस्किन धीरे-धीरे खुद ही पीछे जाने लगती है। जबरदस्ती पीछे खींचने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दर्द और चोट हो सकती है।
इलाज तब जरूरी होता है जब फिमोसिस लक्षण या समस्या पैदा करने लगे। निम्न स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लें:
- पेशाब करते समय दर्द या तकलीफ
- पेशाब करते समय फोरस्किन का फूलना
- बार-बार संक्रमण या लालपन (बैलेनाइटिस)
- साफ-सफाई बनाए रखने में कठिनाई
- बड़े बच्चों या वयस्कों में दर्दनाक इरेक्शन
वयस्कों में फिमोसिस होने पर इलाज की जरूरत अधिक होती है, खासकर अगर यह बाद में विकसित हो। यह संक्रमण, खराब स्वच्छता या डायबिटीज जैसी बीमारियों से जुड़ा हो सकता है।
इलाज की विधि इसकी गंभीरता पर निर्भर करती है। हल्के मामलों में दवाइयों वाली क्रीम और हल्की स्ट्रेचिंग से ठीक किया जा सकता है। गंभीर या बार-बार होने वाले मामलों में छोटा ऑपरेशन जैसे सर्कमसिशन (खतना) किया जा सकता है।
निष्कर्ष: फिमोसिस का इलाज तब करें जब यह दर्द, संक्रमण या दैनिक जीवन में समस्या पैदा करे। समय पर जांच और इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
बच्चों में foreskin (लिंग की त्वचा) का न खुलना अक्सर सामान्य होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में ऑपरेशन (Circumcision) की आवश्यकता पड़ सकती है।
